पुस्तक समीक्षा “ सेवा सदन “
पुस्तक समीक्षा “ सेवा सदन “ अपने प्रिय लेखक प्रेमचंद जी की प्रसिद्ध रचना “सेवा सदन “ पर समीक्षा लिखते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है । सेवा सदन पढ़ने के बाद भारतीय समाज में स्त्री की स्थिति स्पष्ट होती है। नायिका सुमन के पिता जो कि एक ईमानदार दारोगा हैं, अपनी बेटियों से प्यार करने वाले पिता भी, कम आमदनी और निश्चिंत स्वभाव के कारण सारी आमदनी परिवार पर खत्म कर देने की आदत के चलते बेटी के विवाह के लिए कुछ धन एकत्र नहीं कर पाते। दहेज की कुप्रथा के चलते रिश्वत लेते हैं और पकडे जाते हैं । यहीं से शुरु होती है नायिका सुमन के जीवन की समस्याएँ। आयु से दुगुने व्यक्ति से विवाह, पति-पत्नी के बीच सामंजस्य की कमी , उपेक्षा, गरीबी, महत्वाकांक्षाएँ , भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा, वेश्यावृत्ति की समस्या आदि दिखाई हैं । समाज का ऐसा दोहरा मुखौटा पेश करना जहाँ वेश्यावृत्ति को बुरा समझा जाता है पर वहाँ जाने की कामना सभी की रहती है। समाज की एक यह भी समस्या दिखाई है कि सुमन के वेश्या होने पर हर जगह उसे उपेक्षा मिलती है। यहाँ तक कि उसकी बहन की बारात भी लौट जाती है। प्रेमी सदन से अपनी बहन का विवाह करवाने पर ...

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