Hindi Unseen Passage Grade 10 हिंदी अपठित गद्य़ांश कक्षा 10

 

Hindi Unseen  Passage Grade 10 हिंदी अपठित गद्य़ांश कक्षा 10

यहाँ पर कक्षा 10 के छात्रों  के अभ्यास के लिए अपठित गद्यांश दिए हैं । इस से विद्यार्थियों को तो मदद मिलेगी ही, साथ  ही शिक्षकों को भी अपठित गद्यांश से संबंधित प्रश्न-पत्र बनाने में सहायता मिलेगी।  अगर आपको यह सामग्री पसंद आती है तो कृपया इस ब्लॉग को सबस्क्राइब करें और अपने साथियों को भी इसके बारे में  जानकारी दें ।

1.निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे बहुवैकल्पिक प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । 

यदि हम चाहते हैं कि भविष्य में अच्छे नागरिक मिलें तो हमें विद्यार्थियों को सभी दृष्टि से योग्य बनाना पड़ेगा। पहली बात उनसे राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार कराने की है। हमारा विद्यार्थी वर्ग अपने को राष्ट्र की धरोहर समझकर अपनी रक्षा करे। उसे यह बात मन में ठान लेनी है कि उसके ऊपर भारत की रक्षा का भार है। उसे स्मरण रखना होगा कि वह उस महान राष्ट्र का नागरिक होने जा रहा है जिसने आदिकाल में ही 'वसुधैव कटुंबकम्' की उद्घोषणा की थी। उसे इसका अक्षरशः पालन करना है।
दूसरी बात यह है कि उसे कर्मठ बनना है। आलस्य को अपना महान शत्रु समझकर उसकी छाया से भी घृणा करनी है। आज आवश्यकता है- अधिक से अधिक उत्पादन करने की, अधिक से अधिक कर्त्तव्यपरायण, अधिक से अधिक प्रगतिशील बनने की। विदेशों से होड़ करने के लिए हमारे छात्रों को समय से काम करने की आदत डालनी होगी। अधिक समय तक काम करने के लिए धैर्य के गुण का विकास करना होगा। आज सामूहिक प्रयत्नों की आवश्यकता है तभी देश से दरिद्रता भागेगी और अज्ञान का अंधकार दूर होगा।

(क) देश के विकास के लिए विद्यार्थियों को क्या करना आवश्यक है?

(i)कर्मठ बनना चाहिए          

(ii)राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास होना चाहिए।

(iii)आलस्य त्याग कर समय का सही उपयोग 

(iv)उपर्युक्त सभी

 

(ख) विद्यार्थियों को योग्य बनाने के लिए क्या करना होगा ?

(i)उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करनी होगी   

(ii) उन्हें शिक्षित करना होगा

(iii) उन्हें कर्मठ बनाना होगा                    

(iv) उपर्युक्त सभी

 

(ग) उपर्युक्त गद्यांश का सर्वोतम शीर्षक क्या होगा?

 (i) युवा शक्ति                                                          

 (ii) विद्यार्थी 

(iii) विद्यार्थी एवं कर्तव्य                                      

(iv) उपर्युक्त सभी

 

(घ) देश से दरिद्रता कैसे दूर होगी ?

(i) सामूहिक प्रयत्न से                                            

(ii)खाना खाकर सोने से

(iii) कभी दूर नहीं होगी                                          

(iv)स्वतः दूर हो जाएगी

 

(ङ) ’विद्यार्थी ” शब्द का संधिविच्छेद होगा:

(i) विद्या + अर्थी                                                 

(ii)विद्+ आर्थी

(iii) विद्या+ र्थी                           

(iv)इनमें से कोई नहीं

2.निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे बहुवैकल्पिक प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए ।           

(ii) मंदिर मेंहमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज्यादा जरूरत है । एक शक्तिबोध और दूसरा सौंदर्यबोध। शक्तिबोध का अर्थ है – देश की शक्ति या सामर्थ्य का ज्ञान । दूसरे देशों की तुलना में अपने देश को हीन नहीं मानना चाहिए। इससे देश के शाक्ति के शक्तिबोध को आघात पहुँचता है। सौंदर्यबोध का अर्थ है किसी भी रूप में कुरुचि की भावना को पनपने न देना। इधर-उधर कूड़ा फ़ेंकने , बातचीत में गंदे शब्दों का प्रयोग, इधर-उधर की लगाने, समय देकर न मिलना आदि से देश के सौंदर्य बोध को आघात पहुँचता है। देश के शक्तिबोध को जगाने के लिए हमें चाहिए कि हम दूसरे देशों की अपेक्षा सदा अपने देश को श्रेष्ठ समझें । ऐसा न करने से देश के शक्तिबोध को आघात पहुँचता है। यह उदाहरण इस तथ्य की पुष्टि करता है- शल्य महाबली कर्ण का सारथी था। जब भी कर्ण अपने पक्ष की विजय की घोषणा करता, हुँकार भरता, शल्य अर्जुन की अजेयता का हल्का -सा उल्लेख कर देता। बार-बार इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में संदेह की दीवार डाल दी, जो उसके पराजय की नींव रखने में सफल हो गई।   

प्रश्न:


(क) शक्तिबोध का क्या अर्थ है? 


(i)अपनी शक्ति दिखाना                   


(ii) दूसरे की ताकत को आजमाना


(iii) शेखी बघारना                         


(iv) देश की शक्ति या सामर्थ्य का ज्ञान  


(ख) दूसरे देशों की अपेक्षा सदा अपने देश को श्रेष्ठ समझना चाहिए क्योंकि इससे -


(i) देश के शक्तिबोध को आघात नहीं पँहुचता है।


(ii) देश के शक्तिबोध को आघात पँहुचता है।


(iii) अत्मविश्वास में संदेह की दीवार पड़ती है


(iv) भावी पराजय की नींव पड़ती है।


(ग) सारथी शल्य ने कर्ण के पराजय की नींव कैसे डाली?


(i) युद्धक्षेत्र में रथ रोककर             


(ii)युद्धक्षेत्र में कर्ण को अकेला छोड़कर


(iii)कर्ण के आत्मविश्वास का बल बढ़ाकर   


(iv) कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह की दीवार डालकर


घ) किस बात से देश के सौंदर्यबोध को आघात पँहुचता है?


(i) इधर-उधर कूड़ा फ़ेंकने              


(ii)बातचीत में गंदे शब्दों का प्रयोग 


(iii)समय देकर न मिलना              


(iv)उपरोक्त सभी


(ङ) “इधर-उधर की लगाने” का अर्थ है -


(i) बहुत बात करना                       


(ii)चुगली करना  


(iii) झूठ बोलना                           


(iv)इनमें से कोई नहीं 





प्रश्‍न 3: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे बहुवैकल्पिक प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए ।                                                       


मनुष्य अनुकरणशील प्राणी है। अतः आस-पास के लोगों से एवं सहचरों से कर्म सीखता है। किसी मनुष्य की प्रकृति क्या है, उसके स्वाभाविक गुण क्या हैं, उसका नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक चरित्र कैसा है, किस विषय में उसकी अभिरुचि है, इन सभी बातों का ज्ञान हमें उसकी संगति से होता है। किसी महापुरुष का कथन है कि यदि किसी को मित्र एवं सुहृदय बनाना हो तो उसके सहचरों को देखना चाहिए। अतः उसके संगी कौन हैं, मित्र कौन-कौन हैं, इससे ही उसका परिचय मिलता है। सुसंगति एक ऐसी पारसमणि है जो लोहे को भी सोना बनाने की क्षमता रखती है। चंदन के समीप रहने से आस-पास के वृक्ष भी सुगंधित हो जाते हैं। दूध के साथ पानी भी उसी मूल्य बिकता है। जल की बूंद यदि गर्म तवे पर पड़े तो वह तत्क्षण मिट जाएगी। यदि संयोग से यही बूँद सीप के मुख में गिरे तो वह उज्ज्वल मणि बनेगी। यही सत्संग की महत्ता है।



 (क) मनुष्य अपना अधिकतर कर्म कहाँ सीखता है?

(i) समाज में                               

(iii) छवि गृह में                            

(iv) विदेश में

(ख) किसी मनुष्य की संगति से हमें उसके बारे में क्या पता चलता है ?

(i)उसकी प्रकृति                          

(ii)उसका नैतिक ,आध्यात्मिक और सामाजिक चरित्र       

(iii)किसी विषय में उसकी अभिरुचि       

(iv) उपर्युक्त सभी

(ग) सुसंगति पारसमणि के समान है क्योंकि

(i)सुसंगति अच्छा शब्द है              

(ii) सुसंगति से बुरा भी अच्छा हो जाता है।

(iii) सुसंगति से अच्छा धनार्जन होता है   

(iv) उपर्युक्त सभी

 (घ) मनुष्य कैसा प्राणी है ?

(i)शिथिल                               

(ii) सुसुप्त

(iii) अनुकरणशील                         

(iv) मूढ़

(ङ) यदि किसी को मित्र और सुहृदय बनाना हो तो किसे देखना चाहिए?

(i) उसके सहचरों को                                             

(ii)उसके कपड़ों को

(iii)उसके धन को                                                 

(iv) उपर्युक्त सभी 

प्रश्‍न 4: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे बहुवैकल्पिक प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । 

शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकर है। ज्ञान के प्रकाश से ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे, व्यर्थ है यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती, तो उससे क्या लाभ? सहृदय, सच्चा परंतु अनपढ़ मज़दूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव और सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार व उत्तरदायित्व भी हैं। शिक्षित व्यक्ति को अपने उत्तरदायित्वों और कर्तव्यों का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का क्योंकि उत्तरदायित्व निभाने और कर्तव्य करने के बाद ही हम अधिकार पाने के अधिकारी बनते हैं ।

(क) मनुष्य और समाज के विकास के लिए आवश्यक है-

      (i)पाठ्य-पुस्तक                           (ii) अधिकार

      (iii)वैभव                                  (iv) शिक्षा

(ख) शिक्षा से हमें क्या लाभ प्राप्त होते है?

(i) जीवन के रहस्य पता चलते हैं।  

(ii) मस्तिष्क और देह का उचित प्रयोग पता चलता है।

(iii)गंभीर चिंतन प्राप्त होता है।          

(iv) उपर्युक्त सभी

(ग) शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है व्यक्ति को-

(i) निर्दय और चरित्रहीन बनाना          

(ii) वैभव और सुख-साधन संपन्न बनाना

(iii) सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक बनाना 

(iv) विद्वान बनाना।

(घ) मनुष्य तब तक सुखी नहीं हो सकता जब तक उसे -

 (i) शिक्षा प्राप्त न हो ।                     

(ii) आत्मिक ज्ञान प्राप्त न हो।

(iii) अधिकार प्राप्त न हों                    

(iv) अपनी पहचान नहीं मिलती है ।

(ङ) हम अधिकार पाने के अधिकारी कब बनते हैं?

(i) उत्तरदायित्व निभाने और कर्तव्य करने के बाद  

(ii) स्नातक बनने के बाद  

(iii)शिक्षा प्राप्ति के बाद                                                  

(iv) उपरोक्त में से कोई नहीं



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